कचरे से घिरी बस्तियों से साहित्य के मंच तक पहुंचे बच्चों के सवाल

जयपुर: जयपुर साहित्य महोत्सव 2026 में वंचित समुदायों से जुड़े बच्चों की वास्तविक जीवन की कहानियों को प्रसिद्ध साहित्यिक कृतियों के साथ प्रस्तुत किया जा रहा है। इन कहानियों के माध्यम से यह दिखाया जा रहा है कि जिज्ञासा और सवाल पूछने की आदत बच्चों के जीवन में बदलाव ला सकती है।
चाइल्ड राइट्स एंड यू (CRY) की इस पहल में हैरी पॉटर, एलिस इन वंडरलैंड और चाचा चौधरी जैसे लोकप्रिय साहित्यिक संदर्भों को उन बच्चों की कहानियों के साथ जोड़ा गया है, जिन्होंने अपनी परिस्थितियों पर सवाल उठाए और समाधान की दिशा में कदम बढ़ाए।
क्राई की क्षेत्रीय निदेशक सोहा मोइत्रा ने कहा, “साहित्य हमेशा यह दिखाता रहा है कि जिज्ञासा से बदलाव की शुरुआत होती है। जब बच्चों को अपने अधिकारों, भविष्य और आसपास की समस्याओं पर सवाल करने का अवसर मिलता है, तो वे असमानताओं को चुनौती दे पाते हैं।”
जयपुर की रामदेव बस्ती की एक कहानी में बच्चों ने यह सवाल उठाया कि मानसून के दौरान कचरे और बीमारी के कारण उनकी पढ़ाई क्यों रुके। बच्चों के प्रयासों से स्थानीय प्रशासन ने करीब 70 किलोग्राम कचरा हटाया, जिससे 400 से अधिक परिवारों को लाभ हुआ और बच्चों की पढ़ाई दोबारा शुरू हो सकी।
एक अन्य कहानी तमिलनाडु की मलिनी की है, जो एक वंचित समुदाय से आती हैं। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने डॉक्टर बनने का सपना देखा। स्कूल में बने रहने के लिए सहयोग मिलने पर वह अब मेडिकल की पढ़ाई कर रही हैं और अपने गांव से पहली डॉक्टर बनने वाली हैं।

इन कहानियों को साहित्यिक कथाओं के साथ रखकर यह पहल यह बताती है कि सवाल पूछना केवल किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बच्चों के जीवन में वास्तविक बदलाव का माध्यम भी बन सकता है।
जहां किताबों में जिज्ञासा को रोमांच की शुरुआत बताया जाता है, वहीं ये कहानियां इसे बदलाव का साधन दिखाती हैं।
यह क्राई की जयपुर साहित्य महोत्सव में लगातार दूसरी भागीदारी है।
यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब शिक्षा व्यवस्था में बदलाव, सीखने की गुणवत्ता और बच्चों की भागीदारी को लेकर देशभर में चर्चा चल रही है।
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