“धूप, दीप, मंत्र और श्रद्धा—जयपुर में शुरू हुआ दिव्यता का पांच दिवसीय उत्सव”

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माही संदेश

जयपुर के आध्यात्मिक वातावरण में मानो हवा में वैदिक मंत्रों की तरंगें घुल गई हों। श्री श्री 1008 श्री रामेश्वर धाम बालाजी महाराज मंदिर प्रांगण,कनक विहार में शिव परिवार प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव एवं श्री राम महायज्ञ का आरंभ ऐसी पवित्रता के साथ हुआ कि श्रद्धालुओं के मन ही नहीं, मंदिर का हर कण भी आलोकित हो उठा।

आस्था की अलौकिक सुबह

प्रातः 8:30 बजे जैसे ही पूज्य आचार्य श्रवण सामवेदी शास्त्री के नेतृत्व में मंगलाचरण और वेदघोष प्रारंभ हुआ, वातावरण में एक दिव्य ऊर्जा फैल गई।
गोपूजन, देव आवाहन, अभिषेक और हवन की पवित्र अग्नि ने प्रथम दिवस को आध्यात्मिकता का अद्वितीय रूप प्रदान किया। भक्तों ने मिलकर जो आरती गाई, वह केवल स्वर नहीं थी—वह जैसे मन की सारी विकृतियों को शुद्ध करती हुई ध्वनि बन गई।

दूसरे व तीसरे दिन—अनुष्ठानों की सुगंध

2 और 3 दिसंबर को रुद्राभिषेक, शिव–पार्वती आराधना, कालशांति हवन, लघुरुद्र, पुष्पांजलि और भजन संध्या से मंदिर परिसर पुष्प–सुगंध और धूप की महक से भर उठा
दोपहर की कथा और प्रवचनों में आध्यात्मिक चिंतन की धारा बही । महाप्रसाद में भक्तों का स्नेह और सेवा भाव शामिल होगा।

चौथा दिन—प्रतिष्ठा की तैयारियों का उल्लास

4 दिसंबर को स्वस्तिवाचन, देवता पूजन अनुष्ठान होंगे, जहां परंपरा और संस्कृति का सुंदर समन्वय देखने को मिलेगा। मंदिर परिसर दिव्य दीपों, मण्डपों और कलशों से सुसज्जित होगा व मूर्ति कलश नगर भ्रमण (रथयात्रा) का शुभारंभ होगा —मानो स्वयं शिव–परिवार का आगमन हो रहा हो।

पांचवां दिन—प्राण प्रतिष्ठा और भव्य कलश यात्रा

5 दिसंबर, महोत्सव का चरम बिंदु होगा—
शिव परिवार प्राण प्रतिष्ठा, हवन की पूर्णाहुति, महाअभिषेक और विशाल कलश यात्रा।
कलश यात्रा की सजावट, मंत्रोच्चार, भक्तों की कतारें और उत्साह—एक अद्भुत दृश्य का निर्माण करेंगे, जो हर किसी के मन में स्थायी छाप छोड़ेगा।
अंत में महाप्रसाद पूरे दिन की साधना का मधुर फल बनकर श्रद्धालुओं को प्रदान किया जाएगा।

दिव्य उपस्थिति

पूरे आयोजन में
श्री श्री 1008 श्री चंद्र भारती महाराज
अपनी शांति–मय उपस्थिति और आशीर्वचनों से भक्तों को आध्यात्मिक ऊँचाइयों का अनुभव कराएंगे।

जहाँ आस्था जीवित होती है…

यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं—बल्कि भक्ति, संस्कृति, सेवा और आध्यात्मिक समृद्धि का उत्सव है।
जयपुर के लिए यह पांच दिन ऐसे होने वाले हैं, जब हर सुबह मंत्रों से शुरू होगी और हर शाम दिव्यता के स्पर्श से समाप्त।

आयोजक —
आचार्य श्रवण सामवेदी शास्त्री, चितौड़गढ़
लीलाधर दीक्षित (नीलू भैया), जयपुर
स्थान —
श्री श्री 1008 श्री रामेश्वर धाम बालाजी महाराज
कनक विहार अजमेर रोड , जयपुर

जयपुर में भक्ति का एक नया पर्व जन्म ले चुका है—और पूरा शहर उसकी सुगंध में रंग चुका है।


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