ऑपरेशन सिंदूर’ ने लिखा आत्मनिर्भर भारत का नया अध्याय…अजेय भारत का उद्घोष: शांति का पक्षधर, पर दुस्साहस का काल

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स्वदेशी हथियारों से दहला दुश्मन: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की पहली वर्षगांठ पर जयपुर में तीनों सेनाओं की हुंकार
65% स्वदेशी हथियारों का हुआ उपयोग, पहलगाम के शहीदों को सेना का सबसे कड़ा और सटीक जवाब


(जयपुर): शूरवीरों के बलिदान और राष्ट्र की रक्षा के प्रति अटूट संकल्प को एक बार फिर रेखांकित करते हुए, भारतीय सेना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि देश की सीमाओं और नागरिकों पर किसी भी प्रकार का दुस्साहस बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐतिहासिक ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की पहली वर्षगांठ के अवसर पर जयपुर स्थित दक्षिण पश्चिमी कमान (South Western Command) में भारतीय थलसेना, वायुसेना और नौसेना के शीर्ष अधिकारियों ने एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस शौर्य गाथा के विभिन्न पहलुओं को देश के सामने रखा।
अंतर्राष्ट्रीय मासिक पत्रिका ‘माही संदेश’ की इस विशेष रिपोर्ट के अनुसार, यह ऑपरेशन न केवल सैन्य पराक्रम का अद्वितीय उदाहरण है, बल्कि रक्षा क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर भारत’ की बढ़ती ताकत का भी सशक्त प्रमाण है।
‘आत्मनिर्भरता’ केवल नारा नहीं, हमारी असली ताकत
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशन (DGMO) और डिप्टी चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने स्पष्ट किया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में 65% से अधिक स्वदेशी रक्षा उपकरणों और हथियारों का उपयोग किया गया। 7 मई 2025 को किए गए इस ऑपरेशन में थल सेना ने 7 और वायु सेना ने 2 महत्वपूर्ण लक्ष्यों को सटीक निशाना बनाया। इस कार्रवाई में पाकिस्तान के 100 से अधिक जवानों और 100 से ज्यादा आतंकियों को मार गिराया गया। दुश्मन को इतना भारी नुकसान उठाना पड़ा कि उन्हें खुद संघर्ष विराम की गुहार लगानी पड़ी।
शहादत का बदला: वायुसेना को मिली थी पूरी ‘ऑपरेशनल छूट’
पहलगाम हमले में अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर जवानों को याद करते हुए एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती ने कहा कि सेनाओं को इस ऑपरेशन के लिए पूरी छूट (Operational Freedom) दी गई थी। वायुसेना के अचूक प्रहार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भारत के किसी भी नागरिक या सैन्य ढांचे को नुकसान पहुंचाए बिना, दुश्मन के 9 आतंकी ठिकाने और 11 एयर फील्ड पूरी तरह नेस्तनाबूद कर दिए गए। हवा में भी भारत का वर्चस्व कायम रहा; दुश्मन के 13 विमान मार गिराए गए, जिनमें एक ‘एयर वार्निंग विमान’ को 300 किलोमीटर की रिकॉर्ड दूरी से ढेर किया गया।
नौसेना का अभेद्य चक्र और चीन पर नजर
तीनों सेनाओं के बेहतरीन समन्वय की जानकारी देते हुए वाइस एडमिरल ए एन प्रमोद ने बताया कि 6 और 7 मई की रात को भारतीय नौसेना ने भी आतंकवादी ढांचे पर हुए प्रहार में सक्रिय भूमिका निभाई। भारतीय नौसेना की आक्रामक तैनाती ने पाकिस्तान की नौसैनिक और वायु इकाइयों को अपने ही बंदरगाहों में दुबकने पर मजबूर कर दिया। इसके अतिरिक्त, सेना ने यह भी स्पष्ट किया कि पाकिस्तान को चीन से मिलने वाली अंतरिक्ष, साइबर और सैन्य मदद को भारतीय सैन्य रणनीति के आकलन में पूरी तरह शामिल किया गया है।
भविष्य की रक्षा तैयारियां
लेफ्टिनेंट जनरल जुबिन ने जानकारी दी कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद ‘IACCS’ और ‘आकाशतीर’ जैसी उन्नत एयर डिफेंस प्रणालियों को और अधिक मजबूत किया गया है। इसके अलावा, दुश्मन के दुष्प्रचार और फेक न्यूज का रियल-टाइम में मुकाबला करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लैस एक नया ‘डिफेंस स्ट्रैटजिक कम्युनिकेशन डिवीजन’ जल्द ही स्थापित किया जा रहा है।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने यह निर्विवाद संदेश दे दिया है कि भारत शांति का पक्षधर है, लेकिन जब उसकी शांति को कमजोरी समझने की भूल की जाएगी, तो जवाब ऐसा होगा जिसकी गूंज दुश्मन की सरहदों के पार तक, सदियों तक सुनाई देगी।


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