
राजेंद्र सिंह गहलोत (वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक)
विनय शर्मा ने यूनिवर्सिटी बडौदा से प्रिन्ट मेकिंग में पोस्ट ग्रेज्युएट डिप्लोमा लिया, तत्पश्चात इंग्लैंड की जाॅन मूर यूनिवर्सिटी से छापाकला की विशेष शिक्षा प्राप्त की।





सफर की शुरुआत हुई राजस्थान यूनिवर्सिटी में फाइन आर्ट्स डिपार्टमेंट में लेक्चरर के रूप में, दो साल भावी कलाकारों को शिक्षित किया। इसी दौरान जवाहर कला केन्द्र, जयपुर बनकर तैयार हो रहा था, जवाहर कला केन्द्र के निदेशक के पद पर विजय वर्मा आईएएस को बैठाया गया, उन्होंने विनय शर्मा से आग्रह किया कि जवाहर कला केन्द्र में दृश्य कला में स्थाई कार्यक्रम अधिकारी के पद पर आपकी सेवाओं की जरूरत है, इस तरह फाईन आर्ट्स के लेक्चचर बन गये जवाहर कला केन्द्र में दृश्य कला में स्थाई कार्यक्रम अधिकारी।
8 अप्रैल, 1993 को जब जवाहर कला केन्द्र का उद्घाटन भारत के राष्ट्रपति डाॅक्टर शंकर दयाल शर्मा ने अपनी धर्मपत्नि विमला शर्मा की मौजूदगी में किया तो विनय शर्मा भी बतौर स्थाई कार्यक्रम अधिकारी दृश्य कला मौजूद थे, जो सफर राजस्थान ललित कला अकादमी में प्रदर्शनी अधिकारी के पद पर नियुक्ति के साथ ही थमा और यह नया सफर वर्ष 2025 की शुरुआत में हुई उनकी सेवानिवृत्ति तक जारी रहा।
पेपरमेन के नाम से मशहूर फ्रीलांस आर्टिस्ट विनय शर्मा
सेवानिवृत्ति के पश्चात फ्रीलांस आर्टिस्ट के रूप में सक्रिय विनय शर्मा कागज के हस्तलिखित बहीखातों से बने कपडों को पहनकर भारतीय अध्यात्म, भारतीय चिंतन का जीवंत प्रदर्शन दर्शकों के सामने करते हैं, इसलिये वह दर्शकों में पेपरमेन के नाम से मशहूर हो गये। दर्शकों ने महसूस किया कि वह बेहद संवेदनशील आर्टिस्ट हैं।
विनय शर्मा की संवेदनशील सृजनात्मकता पर लिखा गया शोध प्रबंध
विनय शर्मा की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विनय शर्मा पर शोध प्रबंध लिखा गया ”कलाकार विनय शर्मा की संवेदनशील सृजनात्मकता: एक विश्लेषणात्मक अध्ययन।”
वनस्थली विद्यापीठ के ललित कला संकाय में डाॅक्टर आॅफ फिलाॅसॅफि चित्रकला की उपाधि हेतु शोधार्थी मनोजकुमार टेलर ने शोध निर्देशिका प्रोफेसर किरन सरना विभागाध्यक्ष, विजुअल आर्ट विभाग, वनस्थली विद्यापीठ के निर्देशन में शोध प्रबंध पूरा किया।
संवेदनशील विनय शर्मा का राग – अतीत राग
विनय शर्मा की संवेदनशीलता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि वह अतीत से इस कदर जुडे हुए हैं कि कहते हैं वर्तमान मुझे बहुत अच्छा लगता है, लेकिन वर्तमान को जीने के लिये अतीत की ओर झांकना होता है, तभी सुखद भविष्य की कल्पना साकार हो पाती है।
अतीत किसी का भी हो, अतीत अतीत होता है और विनय शर्मा अतीत की यादों से जुडी हर वस्तु को इस कदर सहेज कर रखते हैं कि जैसे वह इंसान हो, वह उन वस्तुओं से बातें करते हैं और उनके माध्यम से अतीत की यादों में खो जाते हैं, उनके स्टूडियो अतीत राग में अतीत को याद कराती घडिया, टेलिफोन, रेडियो, टेलीविजन, झूमर, टाइपराइटर, बिजली के मीटर, कठपुतलियां एवं अनेक प्राचीन धरोहर का संग्रह मिल जायेगा, वह कहते हैं कि हर घर में स्मृतियों का एक कोना होना बेहद जरूरी है, जिसमें हम अपने पूर्वजों की यादों को सुरक्षित रख सकें, फिर वो कोना ही मंदिर, मस्जिद, गुरूद्वारा या चर्च हो जाता है, जहां बैठे हुए हमारे पूर्वज हमें आशीर्वाद देते हैं।