भविष्य के युद्ध केवल हथियारों से नहीं, नवीन सोच और तालमेल से जीते जाएंगे: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

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जयपुर में संपन्न द्वितीय संयुक्त कमांडरों के सम्मेलन में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता, उन्नत तकनीक और नई सैन्य रणनीति पर जोर


जयपुर:

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि उभरते भू-राजनीतिक परिदृश्य में भविष्य के युद्ध केवल हथियारों के बल पर नहीं, बल्कि नवीन सोच, उन्नत तकनीक और तीनों सेनाओं के अभूतपूर्व तालमेल से जीते जाएंगे। राजस्थान के जयपुर में आयोजित द्वितीय संयुक्त कमांडरों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने भारतीय रक्षा बलों की त्वरित, सटीक और संयुक्त कार्रवाई की जमकर सराहना की।
इस सम्मेलन का मुख्य विषय ‘नए क्षेत्रों में सैन्य क्षमता’ (Military Capability in New Domains) था, जिसमें रक्षा मंत्रालय और सशस्त्र बलों के शीर्ष नेतृत्व ने भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों और तैयारियों पर व्यापक मंथन किया।


सम्मेलन के प्रमुख बिंदु और रक्षा मंत्री का संबोधन:

  • ‘ऑपरेशन सिंदूर’ – भारत के अदम्य संकल्प का प्रतीक:
    रक्षा मंत्री ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को अल्पकालिक, गहरे मार करने वाले (Deep Strike), उच्च-तीव्रता और बेहद प्रभावकारी सैन्य अभियान करार दिया। उन्होंने कहा कि यह ऑपरेशन राष्ट्रीय हितों की रक्षा में भारतीय सेनाओं की क्षमता का अचूक प्रमाण है, जिसने शत्रु को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर कर दिया। यह अभियान देश की नई सैन्य रणनीति और सामूहिक संकल्प को दर्शाता है।
  • भविष्य के युद्ध और तकनीकी सशक्तिकरण:
    श्री सिंह ने कमांडरों से भविष्य की चुनौतियों के लिए मुस्तैद रहने का आह्वान करते हुए कहा कि आने वाले समय के संघर्ष ‘हाइब्रिड’ होंगे। ये युद्ध साइबर, अंतरिक्ष, विद्युत चुम्बकीय और संज्ञानात्मक (Cognitive) डोमेन में एक साथ लड़े जाएंगे। इसके लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), स्वायत्त प्रणालियों, डेटा एनालिटिक्स और सुरक्षित संचार नेटवर्क में क्षमताओं को और अधिक सुदृढ़ करने की आवश्यकता है।
  • ‘हैरत में डालने का तत्व’ (Element of Surprise):
    रणनीतिक बढ़त हासिल करने के लिए रक्षा मंत्री ने ‘हैरत में डालने के तत्व’ को कुंजी बताया। उन्होंने कमांडरों को निर्देश दिया कि वे देश के शत्रुओं के लिए हमेशा अप्रत्याशित बने रहें और दुश्मन की किसी भी ऐसी चाल के प्रति सतर्क रहते हुए उनसे हमेशा दो कदम आगे रहें।
  • तीनों सेनाओं में एकीकरण (Jointness):
    थल, वायु और नौसेना के बीच बढ़ते संयुक्त रुख, एकीकरण और नई तकनीकों को अपनाने की दिशा में हुई प्रगति की रक्षा मंत्री ने सराहना की। उन्होंने स्पष्ट किया कि वैश्विक रक्षा क्षेत्र में हो रहे व्यापक बदलावों के बीच यह संयुक्त रुख एक बेहद महत्वपूर्ण आयाम है।
  • सरकार की प्रतिबद्धता:
    प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए, श्री राजनाथ सिंह ने अत्याधुनिक हथियारों, उन्नत प्रणालियों और विशिष्ट क्षेत्रों में अनुसंधान (R&D) के माध्यम से रक्षा बलों की क्षमता बढ़ाने के प्रति सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता दोहराई।

  • महत्वपूर्ण विमोचन और प्रदर्शन:
    सम्मेलन के दौरान रक्षा मंत्री द्वारा कई महत्वपूर्ण प्रस्तुतियां और विमोचन किए गए:
  1. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर वृत्तचित्र (Documentary): सैन्य परिचालन तैयारियों और निर्णायक युद्धक क्षमताओं को प्रदर्शित करने वाली एक विशेष फिल्म जारी की गई।
  2. विजन 2047 (हिंदी संस्करण): सशस्त्र बलों के भविष्य के विजन का हिंदी संस्करण जारी किया गया।
  3. एकीकृत संचार प्रणाली के संयुक्त सिद्धांत: बहुक्षेत्रीय अभियानों में सशस्त्र बलों के बीच वैचारिक स्पष्टता और अंतर-संचालनीयता (Interoperability) को मजबूत करने के लिए इसे जारी किया गया।
    भविष्य की रणनीतियों पर मंथन:
    सम्मेलन के दौरान संज्ञानात्मक युद्ध, क्वांटम तकनीक, एआई-सक्षम खतरों के विरुद्ध साइबर अनुकूलता, और स्वदेशी नवाचार जैसे गंभीर विषयों पर चर्चा हुई। साथ ही खुफिया तालमेल और सूचना प्रबंधन के लिए विकसित उन्नत प्रणालियों का प्रदर्शन भी किया गया।
    सम्मेलन में इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति:
    इस उच्च स्तरीय मंथन में प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (CDS) जनरल अनिल चौहान, नौसेना अध्यक्ष एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी, सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी, वायु सेना अध्यक्ष एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, डीआरडीओ (DRDO) अध्यक्ष डॉ. समीर वी कामत, रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार सहित कई अन्य वरिष्ठ नागरिक और सैन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

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